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बढ़ती आधुनिकता के साथ बढ़ती सेक्स एजुकेशन की ज़रूरत

21वीं सदी अपने साथ मानवता के लिए अनेक उपहार लेकर आया है. मानव आज जितना आधुनिक और सुविधासंपन्न है उतना पहले कभी नहीं था. सुविधासंपन्न होने का असर ये हुआ है कि अब लोग चीजें खुद से करने की जगह किसी टेक्नोलॉजी के ज़रिए उस काम को पूरा करना चाहते हैं. अब अधिकतर लोगों में खुद कुछ सीखने की आदत ख़त्म होती जा रही है. किताबें पढ़ने की आदत तो और भी कम हो चुकी है. नतीजा यह है कि ज्ञान की कमी की वजह से लोग या तो टेक्नोलॉजी का पूर्ण रूप से इस्तेमाल करने में असमर्थ हैं या फिर गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.

इसका एक उदाहरण हम लोगों के जीवन में जिओ के पदार्पण के रूप में देखते हैं. जिओ के पहले इंटरनेट पैक्स के दाम बहुत ज्यादा थे. अन्य ऑपरेटर मनमाने दाम वसूल रहे थे. जिओ के आने से लोगों को बहुत ही  कम दाम पर तेज स्पीड इंटरनेट की सुविधा मिलने लगी जिसकी वजह से अनेक फायदे उन्हें मिलने लगे. लेकिन एक समस्या ने भी अपनी जड़ पकड़नी शुरू कर दी. बेरोजगारी की वजह से बहुत सारी मात्रा में खाली समय और फ़ास्ट-फ्री इंटरनेट ने लोगों को पोर्न का आदी बना दिया. हमारे देश में सेक्स एजुकेशन का नाम सुन कर तो नाक-भौंह सिकोड़ी जाती है लेकिन अकेले में छुप-छुप कर पोर्न का सेवन करने में लोग बहुत आगे हैं. भारत अत्यधिक मात्रा में पोर्न का सेवन करने वाले देशों में शुमार है. लेकिन जब सही और सुरक्षित तरीके से सेक्स करने के ज्ञान की बात आती है, तो लोग इसमें बहुत पीछे हैं. ये बात कुछ इस तरह की है कि हम बिना पढ़े परीक्षा में बैठना और पास भी होना चाहते हैं. अपनी कुंठा और अवसाद को मिटाने के लिए लोग पोर्न देखते हैं और फिर भी जब वह मिटता दिखाई नहीं देता तो बलात्कार पर उतारू हो जाते हैं. और ये सब हो रहा है उस देश में जिसने दुनिया को कामसूत्र जैसा महान ग्रन्थ दिया.

लोगों के मानसिक स्तर को बिना बढ़ाए उन्हें आधुनिक सुविधाएं देते जाना कुछ इस तरह ही है जैसे किसी के हाथ में बंदूक दे दी जाए और उसे सेफ्टी लॉक के बारे में बताया ना जाए. इसी वजह से आज हमें सेक्स एजुकेशन की सबसे ज्यादा ज़रूरत है.

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