ये बात तो बिलकुल सत्य है कि फिल्म में जब विलेन नहीं होता है तो हीरो का कोई मतलब नहीं रह जाता. यानी जितना तगड़ा विलेन उतना तगड़ा हीरो. हीरो को हिरोगिरी दिखाने का मौका ही विलेन देता है. वरना हीरो के पास करने के लिए क्या काम बचता है? कुछ नहीं. 7 हीरो जब वो विलेन (Hero Become Villain) बने तो फिल्म के हीरो भी इनसे घबरा गए.

7 हीरो जब वो विलेन (Hero Become Villain) बने तो फिल्म के हीरो भी इनसे घबरा गए

1. राणा दग्गुबती

अब ‘बाहुबली’ को ही ले लीजिए. इसमें भल्लालदेव के निगेटिव रोल में अभिनेता राणा दग्गुबती यदि इतने मजबूती से अपना किरदार नहीं निभाते तो बाहुबली अपना पराक्रम कैसे दिखा पाता. पूरी फिल्म में हीरो जितना ही वो भी छाए हुए हैं. यहाँ तक कि पब्लिक उनके लिए भी तालियाँ बजातीं है.

2. रितेश देशमुख

वैसे तो रितेश देशमुख की छवि एक हंसोड़ अभिनेता की थी. लेकिन फिल्म ‘एक विलेन’ इनके करियर का मिल का पत्थर है. इस बात को वो भी मानेंगे. इस फिल्म के बाद ही लोगों को लगा कि रितेश और सिद्धार्थ एक्टिंग भी कर सकते हैं.

3. पूरब कोहली

इसे संयो ही कहेंगे कि वीजे, ड्रमर और ट्रेवल गाइड के रूप में करियर की शुरुवात करने वाले पूरब कोहली की पहचान हालिया रिलीज फिल्म नूर से बनी है. इसके पहले रॉक ऑन-2 में भी इनका रोल ठीक था. लेकिन इसमें वो अपनी छाप नहीं छोड़ पाए.

4. वरुण धवन

‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाले वरुण धवन को देखकर लोगों ने यही माना कि डेविड धवन के बेटे होने के कारण उन्हें फिल्मों में काम करने का मौक़ा मिल गया लेकिन श्रीराम राघवन की फिल्म ‘बदलापुर’ से उन्होंने अपनी छाप छोड़ने का मौका मिला जिसे उन्होंने स्वीकार किया.

5. विकी कौशल

एक बेहद छोटे बजट की फिल्म मसान से लाइमलाइट में आये विकी कौशल को विलेन बनाने का करिश्मा अनुराग कश्यप ने ही दिखाया. भ्रष्ट पुलिस ऑफिसर के उनके रोल ने इनकी काबिलियत को निखारने का काम किया.

7 हीरो जब वो विलेन (Hero Become Villain) बने तो फिल्म के हीरो भी इनसे घबरा गए

6. ऋतिक रोशन

इस फिल्म का विलेन तो अद्भुत था. हीरो से ज्यादा फूटेज और तालियाँ इस फिल्म में हृतिक को मिलीं. यहाँ तक कि इस फिल्म के बाद उन्हें मिडिया में आकर बताना पड़ा कि ये फिल्म जीतनी हृतिक की है उतनी ही उनकी भी है.

7. संजय दत्त

कांचा चीना के इस रोल को संजय दत्त ने जिस समर्पण के साथ निभाया वो काबिले तारीफ़ है. यदि वो सर नहीं मुंडवाते तो शायद इतना ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाते. फिल्म अग्निपथ का ये रीमेक संजय दत्त के लिए मिल का पत्थर है.

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