बात Mahabharat हो तो कृष्ण की चर्चा तो होनी ही होनी है. क्योंकि युद्ध को टालने से लेकर युद्ध की तैयारी तक में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी. कृष्ण ही थे जिन्होंने धनुष त्याग चुके अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित किया. पांडवों को उनके हक़ के लिए लड़ना सिखाया. शकुनी जैसे शातिर की चालों से पांडवों को आगाह किया. तो आज आपको ये बता रहे हैं कि इनके अलावा महाभारत में और कौन-कौन थे जो जिनकी समझ बेहतर थी.क्या आपको पता है Mahabharat की इन खास बातों के बारे में?

Mahabharat में सहदेव

महाभारत में सहदेव को आप बुद्धिमता में कृष्ण के बाद दुसरे स्थान पर रख सकते हैं. क्योंकि इन्हें कई विषयों और भाषाओं का ज्ञान था. शास्त्रों-शास्त्रों से लेकर चिकित्सा आदि में भी बेहद निपुण थे सहदेव. यहाँ तक कि इनके पास भविष्य देखने की भी शक्तियां थीं. लेकिन देवताओं ने अपने डर के कारण उन्हें श्राप दिया था कि वो अपनी इस शक्ति का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. कहा जाता है कि सहदेव महाभारत की लड़ाई से पहले ही सबको सच बताने वाले थे लेकिन भगवन कृष्ण ने ऐसा करने से उनको रोक दिया.

कर्ण

इस श्रेणी में अगला नाम सूर्य पुत्र कर्ण का आता है. जाहिर है इनमें भी सहदेव और कृष्ण जैसी ही सूझ-बुझ थी. पांडवों की तरफ से अपमानित किए जाने पर कौरवों में शामिल हो गए और सारी युद्ध की रणनीति बनाई. जिसको जो वचन दिया उसपर कायम रहे. यही कारण था कि दुर्योधन के साथ उनकी मित्रता अंत समय तक टिकी रही.

शकुनि

महाभारत के दुष्ट पात्रों में से एक थे शकुनी. लोगों को आपस में लड़ाकर अपना स्वार्थ साधने में माहिर. यदि स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो कौरवों को पांडवों के खिलाफ शकुनी ही भड़काया. बचपन से ही पांडवों के प्रति कौरवों में इर्ष्या की भावना जगाई. सारे चाल चले और बात महाभारत की लड़ाई तक पहुँच गई. महाभारत की लड़ाई में शकुनी का दिमाग भी था.

अभिमन्यु

गर्भावस्था के दौरान सुनी गईं बातों को याद रखना ही अभिमन्यु की चतुरता की कहानी बयान करता है. उसके बाद जिस तरह से लड़ाई में उसने अपना कौशल दिखाया और सभी महारथियों को हराते हुए आगे बढ़ता गया उससे उसका पराक्रम भी साबित हो गया. लेकिन उसकी बहादुरी के आगे जीत न पाने का बदला लेने के लिए सबने घेर कर उसको मार डाला.क्या आपको पता है Mahabharat की इन खास बातों के बारे में?

अन्य पात्र

इसके अलावा भी कई ऐसे अन्य पात्र थे जिन्होंने अपनी बुद्धिमता और सूझ-बुझ समय-समय पर दिखाई. जैसे कि भीष्म पितामह, अश्वत्थामा, धृतराष्ट्र आदि समझदार तो थे लेकिन कई तरह की परिस्थितियों में घिरकर ये सिमित हो गए थे.

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