चीन (China) को सबक सिखाने के लिए दुनिया के कई देशों ने अब खुलकर प्रयास करने शुरू कर दिये हैं। अब इसी क्रम में इस साल छह अक्टूबर को टोक्यो में हुई क्वाड देशों की मीटिंग में कई महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। जिसमें भारतीय विदेश मंत्री ने कई अच्छी बातें कहीं। इसमें सभी सदस्य देशों ने मिलकर चीन (China) को घेरा।

जानिए कि आलोचना करते समय चीन (China) का नाम क्यों नहीं लेते हैं मोदी?

क्यों निशाने पर है चीन (China)?

श्री सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत ‘नियम आधारित विश्व व्यवस्था, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के लिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान’ के के लिए तैयार हैं। इसके साथ उन्होंने भारत-चीन सीमा विवाद के मामले में चीन (China) का नाम लेते हुए उसकी निंदा की.

जयशंकर ने कहा कि भारत ‘नियम आधारित विश्व व्यवस्था, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के लिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान’ के पक्ष में है. हाँलाकि उन्होंने भारत-चीन सीमा विवाद के मामले में चीन के आक्रामक रुख की निंदा चीन का सीधे नाम लेकर नहीं की. दूसरी तरफ़, अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो सीधे तौर पर चीन का नाम लेकर उस पर हमला बोलते रहे.

कौन कौन से देश शामिल हैं क्वाड में?

जानिए कि आलोचना करते समय चीन (China) का नाम क्यों नहीं लेते हैं मोदी?

क्वाड में शामिल देश भारत, अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया, टोक्यो में चीन के असर को कम करने और उस पर निर्भरता कम करने के उपाय ढूँढने बैठे थे. अनौपचारिक रूप से क्वाड को ‘एशिया का नेटो’ समझा जाने लगा है, जो चीन के बढ़ते प्रभुत्व के ख़िलाफ़ एक कोशिश है.

गलवान में भारत के ख़िलाफ़ चीनी आक्रामकता को पूरा देश गंभीरता से ले रहा है. इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर ने चीन की खुलकर निंदा नहीं की.मंगलवार को भारत को चीन की सामूहिक तरीके से निंदा करने का एक और मौका उस समय मिला जब संयुक्त राष्ट्र में 39 देशों ने चीन के ख़िलाफ़ एक बयान पर हस्ताक्षर किये. इसमें इन देशों ने कहा, “हम झिंजियांग में मानवाधिकारों की स्थिति और हॉन्गकॉन्ग के हालिया घटनाक्रम के बारे में गंभीर रूप से चिंतित हैं.”

LEAVE A REPLY

Please enter your name here
Please enter your comment!