ये तो आप भी मानेंगे कि भगवान से शत्रुता करना सबके बस की बात नहीं है. जो भी ऐसा करेगा उसमें कुछ खासियत तो होगी ही. कुछ ऐसा ही रावण के साथ भी था. क्या आपको पता है Ram and Ravan में कुछ चौंकाने वालीं समानताएं भी थीं.

Ram and Ravan के बीच ये समानताएं जानकार हैरान रह जाएंगे आप

Ram and Ravan

दोनों के नाम का पहला अक्षर रासे शुरू होता है. इस नामाक्षर वाले व्यक्ति अपने सजगता और सक्रियता के लिए जाने जाते हैं. ये किसी भी काम को कल पर नहीं टालते हैं. ये रिश्तों को अहमियत देने वाले और भावुक होते हैं. लेकिन लाभ-हानि देखते समय व्यवहारिकता से काम लेते हैं.

कुंडली में समानता

दोनों के जन्म कुंडलियों में भी बहुत सारी समानताएं हैं. भगवान राम और रावण के कुंडली में पञ्च महापुरुष का योग बना हुआ है जो कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बहुत शुभ योग है. ऐसे व्यक्ति जीवन काल में तो धन वैभव प्राप्त करते ही हैं मरने के बाद भी अमर रह जाते हैं.

किस घर में कौन सी राशि?

जब बात इनके कुंडली की समानता की हो रही है तो आपको ये भी बता दें कि दोनों की कुंडली में मंगल, मकर राशि में, शनि तुला राशि में और गुरु लग्न यानी कुंडली के प्रथम घर में विराजमान हैं.

माताओं में समानता

दोनों की माताओं के नाम का पहला अक्षर से शुरू होता है. श्रीराम चन्द्र जी के माता का नाम कौशल्या है जबकि रावण की माता का नाम कैकशी है. यहाँ यह भी ध्यान देने वाली बात है कि राम की दूसरी माता का नाम कैकेयीहै जिनके राम को वनवास भेजने से ही रावण वध संभव हो पाया.

अराध्यों में भी समानता?

इन दोनों के अराध्य देव भगवान भोले नाथ ही थे. दोनों भोलेनाथ के परम भक्त थे. इस बात का प्रमाण कई जगह पर मिलता है. राम सेतु बनाने से पहले शंकर जी की ही अराधना की थी. जहाँ रामेश्वरम मंदिर है. जबकि रावण की शिव भक्ति का उदाहरण देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम है. जहां भगवान शिव ने ज्योतिर्लिंग के रूप में दर्शन देकर रावण के साथ लंका जाने को राजी हुए थे. लेकिन देवताओं की साजिश के करण ज्योतिर्लिंग देवघर में ही स्थापित हो गया.

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दोनों के भाई

दोनों ने ही अपने जीवन काल में अपने भाइयों का त्याग किया था. राम को समर्थन देने के कारण रावण ने विभीषण को अपमानित करके लंका से निकाल दिया. जो कि बाद में उसके मौत का कारण बने. जबकि भगवान राम ने पहले शत्रुघ्न को सुंदर नामक राक्षस की नगरी का राजा बनाकर स्वयं से दूर कर दिया. फिर बाद में अपनी बात रखने के लिए लक्ष्मण तक को मृत्युदंड दे देते हैं.

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