खुद को अभिव्यक्त करने का एक उत्कृष्ट माध्यम है बोलना. यदि आपको बोलना आ गया तो आपको कोई रोक नहीं सकता. क्योंकि आप अपनी बातों के जादू से दूसरों को मोह सकेंगे. बेहतर कैरियर के लिए जरुरी है बोलने की कला (Art of Speaking), 7 टिप्स से दूर करें कमियाँ.

क्या आपको पता है बोलने की कला (Art of Speaking)? जानिए खास बातें

डरना मना है

ज्यादातर लोगों में ये देखा जाता है कि वो भीड़ के सामने नहीं बोल पाते. यदि आप भी ऐसे ही हैं तो आपको अपग्रेड होने की जरुरत है क्योंकि आजकल कंपनियों में प्रेजेंटेशन देने के लिए आपकी भाषण शैली अच्छी होनी चाहिए. इसके साथ ही लोगों के सामने बेहिचक बोल सकने में समर्थ हों.

पब्लिक स्पीकिंग

कई बार बोलने का डर इस कदर हावी रहता है कि हम अपना सम्मान बचा पाने में भी असमर्थ रहते हैं. तो ऐसे में अच्छा भाषण क्या ख़ाक दे सकेंगे. ऐसे लोगों को अपनी इस खामी का खामियाजा दफ्तर में चुकाना पड़ता है. यानी आपको अपने कैरियर को बेहतर बनाने के लिए इसका हल निकालना चाहिए.

Art of Speaking और भाषण

आजकल लगभग सभी कंपनियों में प्रेजेंटेशन का महत्व बढ़ता जा रहा है. एक अच्छे प्रेजेंटेशन में आपके बोलने की शैली बहुत काम आती है. आपको किसी भी भीड़ को संबोधित करने की कला आनी चाहिए. कहा गया है कि आपकी कामयाबी में आपके काम, इमेज और काम की चर्चा तीनों जरुरी है. लेकिन ज्यादा प्रभावी काम की चर्चा है क्योंकि इसका 60 प्रतिशत तक योगदान होता है. जबकि इमेज का योगदान सिर्फ 30 प्रतिशत है और का तो सिर्फ 10 फीसदी.

न बोलना कैरियर के लिए नुकसानदेह

अब तक आप ये तो समझ ही गए होंगे कि करियर में पब्लिक स्पीकिंग का कितना योगदान है. इंटरव्यू में, पैनल डिस्कसन में, वीडियो कॉफ्रेंसिंग आदि में इसकी जरुरत पड़ती ही पड़ती है. यानी पेशेवर जिंदगी जीने के लिए आपको बोलना पड़ेगा. वर्ना आपके कैरियर पर खतरा है.

TED talks की बात

TED talks की शुरुआत कनाडा में 1984 में हुई थी. इसमें तकनीक, डिजाइन और मनोरंजन जैसे विषयों पर लोगों को खुलकर बोलने का मौक़ा दिया जाता था. आज TED talks के वीडियो ऑनलाइन देखे जाते हैं. जिसमें तमाम विशेषग्य बीस मिनट तक किसी भी मुद्दे पर अपनी बात रखते हैं. इन्हें देखकर भी आप पब्लिक स्पीकिंग के अपने डर को दूर कर सकते हैं.

क्या आपको पता है बोलने की कला (Art of Speaking)? जानिए खास बातें

दिमाग का मायाजाल

अपने दिमाग में छिपे इस डर को समझिए. तभी आप इसका मुकाबला कर पाएंगे या इसे दूर कर पाएंगे. क्योंकि दिमाग आपको पता भी नहीं चलने देगा कि कैसे उसने आपको फंसा रखा है. जानकारों का कहना है कि बोलने के लिए खड़े होते ही डर हमारे दिमाग़ पर हावी हो जाता है. हमारी धड़कनें बढ़ने लगतीं हैं. पसीना आ जाता है. इससे निपटना भी आसान है. इसके लिए हमें पहले से इसकी तैयारी कर लेनी चाहिए. जिस मुद्दे पर बोलना है उसकी समझ बढ़ाएं.

कैसी हो स्पीच (Speech)

बेहतर स्पीच आप रट्टा मारकर कभी नहीं दे पाएंगे. इसके लिए आपको अपने दिमाग में एक रुपरेखा बनाकर उसका अभ्यास करना होगा. स्लाइड्स के रूप में दिमाग में तमाम बातों को संजोना पड़ेगा. ये जरुरु है कि शुरुवाती एक-दो पैरा रट लें लेकिन बाद की बातों को भावनाओं के अनुसार शब्द दें. अंत में सबसे बड़ी बात ये है कि इसका जितना ज्यादा अभ्यास करेंगे उतना ही सफल होंगे. वर्ना केवल पढ़ लेने से क्या होगा?

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