अवसाद या Depression, एक ऐसी बीमारी है जिससे आजकल लगभग सभी लोग ग्रसित हैं. लोगों की जीवनशैली में जिस तरह का परिवर्तन हुआ है, उसकी वजह से अवसाद के मामले बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं. बदलता सामाजिक ढांचा, काम का प्रेशर, रिश्तों में खटास आदि अनेक कारण हैं जिनकी वजह से आदमी डिप्रेशन का शिकार हो रहा है.

अवसाद (Depression) की कैद में कैसे घुटता है हमारा समाज

Depression की शुरुआत

समय के साथ-साथ समाज जितना आधुनिक हुआ है, लोग खुद को उतना ही ज्यादा अकेला महसूस करने लगे हैं. लोग दिखावे के जीवन में ज्यादा विश्वास करने लगे हैं. आपस के सच्चे संवादों में कमी आई है. लेकिन उससे भी दुखद बात ये है कि लोगों को खुद से बात करने के लिए समय नहीं है. स्वयं अपने अंतर्मन से बात करना लगभग सबने छोड़ दिया है. किसी के पास समय नहीं है, ना अपने आप के लिए और ना ही दूसरों के लिए.

नकरात्मकता भी है Depression का एक कारण

एक चिंता का विषय यह भी है कि समाज में ऐसा परिवर्तन आया है कि लोग सकारात्मक चीजों को नीरस करार कर नकारात्मक चीजों के पीछे भागते हैं. नकारात्मक चीजें लिखना और पढ़ना तो जैसे ट्रेंड हो गया है. इससे सबसे ज्यादा प्रभावित युवा वर्ग है. उन्हें ये समझने की ज़रूरत है कि जैसे हम पढ़ते-लिखते हैं या सोचते हैं, हम अंत में वैसे ही बनते जाते हैं. तो हमेशा सकारात्मकता से जुड़ी चीजों को ही आत्मसात करना चाहिए.

अवसाद (Depression) की कैद में कैसे घुटता है हमारा समाज

चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता

कुछ ऐसे लोग होते हैं जिन्हें पता है कि उन्हें अवसाद की दिक्कत हैं और वो उसे दूर करने के जतन करते हैं. कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्हें पता तो होता है लेकिन उससे उन्हें कोई फर्क़ नहीं पड़ता. अवसाद सबसे बड़ी दिक्कत उनके लिए है जो ये जानते ही नहीं हैं कि वो अवसाद की गिरफ्त में हैं. बहुत से लोग अपना इलाज इसलिए नहीं कराते क्योंकि वो सोचते हैं कि लोग क्या कहेंगे. अगर मैं ऐसी प्रॉब्लम के साथ किसी डॉक्टर के पास जाता हूँ तो कहीं पागल ना कहलाने लगूं. पर ये एक गलत कदम है. अगर आप अवसाद से जूझ रहे हैं तो किसी चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें.

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