Stress

अगर तनावग्रस्त रहते हैं तो इसका अंजाम भी जान लीजिए. तनाव शरीर को सात स्थानों पर ज्यादा चोट पहुंचाता है. तनाव शारीरिक हो या मानसिक, शरीर अपनी ऊर्जा को संभावित खतरे से निपटने में लगा देता है. इस दौरान तंत्रिका तंत्र की ओर से एड्रेनाल गं्रथि को एड्रेनेलाइन और कोर्टिसोल जारी करने का संकेत दिया जाता है. ये दोनों हार्मोन दिल की धड़कन को तेज कर देते हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ा देते हैं. पाचन क्रिया तब्दील हो जाती है. खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है.

तनाव का असर किस तरह से होता है आइए इस लेख में जानेंमस्कुलोस्केलेटल सिस्टम और तनाव

मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम यानी मसल्स और स्केलेटन से जुड़ी वह प्रक्रिया जो शरीर को गतिमान बनाती है. तनाव के दौरान मसल्स यानी मांसपेशियां तनाव में आ जाती हैं. नतीजा होता है सिर दर्द और माइग्रेन जैसी कई दुश्वारियां.

श्वसन तंत्र : तनाव की दशा में सांस की आवृत्ति बढ़ जाती है. तेज सांस लेने या हाइपरटेंशन के कारण कभी-कभार दिल का दौरा भी पड़ जाता है.

हृदय की धमनियां : एक्यूट या तीव्र तनाव क्षणिक होता है. इसके आघात से हृदय की गति बढ़ जाती है. हृदय की मांसपेशियों में संकुचन भी ज्यादा होता है. वेसल्स या वाहिकाएं जो बड़ी मांसपेशियों और हृदय तक रक्त पहुंचाती हैं, फैल जाती हैं. नतीजा होता है कि अंगों में रक्त दबाव बढ़ जाता है. तीव्र तनाव की पुनरावृत्ति पर हृदय की धमनियों में सूजन आ जाती है. नतीजा होता है हृदयाघात.

अंत:स्राव प्रणाली

जब शरीर में होता है तो दिमाग हाइपोथैलेमस से संकेत भेजता है. संकेत मिलते ही एड्रेनाल की ऊपरी परत से क्रिस्टोल और इसी ग्रंथि का केंद्र जिसे एड्रेनाल मेड्यूला कहते हैं, वह एपिनेफ्राइन का उत्पादन करने लगता है. इन्हें तनाव हार्मोस भी कहा जाता है.

लिवर : जब क्रिस्टोल और एपिनेफ्राइन प्रवाहित होता है तो रक्त में शर्करा यानी ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है.

पाचन तंत्र क्रिया : भोजन नलिका : के शिकार लोग या तो जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं या फिर कम. अगर ज्यादा खाते हैं या फिर तंबाकू या अल्कोहल की मात्रा बढ़ जाती है तो भोजन नलिका में जलन और एसिडिटी जैसी दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है.

आमाशय : की दशा में आपके आमाशय में उद्वेलन होता है. यहां तक कि उबकाई या दर्द का एक कारण तनाव भी हो सकता है.

आंतें : पाचन क्रिया को भी प्रभावित कर सकता है. इसके नतीजे के तौर पर डायरिया और कब्ज भी उभर सकते हैं.

प्रजनन क्रिया : तनाव की दशा में क्रिस्टोल का अत्यधिक स्राव पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है. अत्यधिक तनाव टेस्टोस्टेरान और शुक्राणुओं के उत्पादन को क्षीण कर देता है. इससे संतानोत्पति क्षमता जा सकती है. तनाव का असर महिलाओं में उनके मासिक धर्म पर पड़ता है. अनियमित होने के साथ अन्य परेशानियां भी बढ़ जाती हैं. यौनेच्छा भी घटने लगती है.

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